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आर्ट एंड क्राफ्ट्स ऑफ़ छत्तीसगढ़

आर्ट एंड क्राफ्ट्स ऑफ़ छत्तीसगढ़

बनयान ट्री बुक्स, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली
अंग्रेज़ी
Hardbound
Art & Culture
बुधवार, 1 जनवरी 2014

पुस्तक का विवरण *

ISBN-10 ‏ : ‎ 8190540173

ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8190540179


इस किताब में, निरंजन महावर उस विशाल इलाक़े के पुरातत्व और कला की दुनिया का नक्शा खींचते हैं, जहाँ की मिट्टी के कण-कण में इतिहास सांस लेता है। यह किताब गुप्त काल की शुरुआत से लेकर शरभपुरिया और कलचुरी जैसे स्थानीय राजवंशों के दौर तक का सफर तय करती है। इसमें मल्हार, सिरपुर और बारसुर जैसी समृद्ध ऐतिहासिक जगहों की गहराई से पड़ताल की गई है—ये ऐसी जगहें हैं जहाँ खुदाई में मिले 'पंच-मार्क सिक्कों' और प्राचीन धातु के काम के रूप में इतिहास आज भी जिंदा दिखाई देता है।


1960 के दशक से इस क्षेत्र में शोध कर रहे विशेषज्ञ निरंजन महावर, हमें अतीत के तकनीकी चमत्कारों के करीब ले जाते हैं। इसमें छठी और सातवीं शताब्दी (ईसवी) के दौरान सिरपुर में बनी कांसे (ब्रॉन्ज़) की बेमिसाल मूर्तियों का खास ज़िक्र है। साथ ही, वे 'अगरिया' जनजाति की उस 'खामोश' कारीगरी को भी सम्मान देते हैं, जिसने पीढ़ियों से लोहा खोदकर और गलाकर वे औजार बनाए, जो यहाँ की खेती-किसानी की रीढ़ बने। यह किताब छोटी और बड़ी, हर तरह की शिल्प-कला का एक बारीकी से तैयार किया गया दस्तावेज़ है। यह पाठकों को उस परंपरा से रूबरू होने का एक दुर्लभ मौका देती है, जहाँ हर ईंट का मंदिर और लोहे का औजार अपनी संस्कृति के टिके रहने और संघर्ष की कहानी सुनाता है।

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