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पंडवानी: महाभारत लोक नाट्य शैली

पंडवानी: महाभारत लोक नाट्य शैली

राधाकृष्ण प्रकाशन
हिंदी
Hardbound
Performing Arts
बुधवार, 1 जनवरी 2014

पुस्तक का विवरण *

ISBN-10 ‏ : ‎ 818361678X

ISBN-13 ‏ : ‎ 978-8183616782


पांडवानी छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की धड़कन है। यह महाभारत महाकाव्य पर आधारित एक अद्भुत कला है, जिसे मंच पर एक ही कलाकार द्वारा प्रस्तुत किया जाता है (जिसे 'मोनो-थियेटर' भी कहते हैं)। इस किताब में, निरंजन महावर इस कला के अनोखे सफर को बहुत खूबसूरती से सामने लाते हैं। उन्होंने बताया है कि कैसे इसकी शुरुआत 'परधान गोंड' जनजाति के गाए मौखिक लोकगीतों से हुई थी। उन्होंने यह भी दर्ज किया है कि कैसे ये प्राचीन आदिवासी किस्से-कहानियाँ घुमंतू 'देवार' समुदाय के साथ सफर करते हुए पूरे छत्तीसगढ़ में फैल गए। यह किताब 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के उस अहम मोड़ को दर्शाती है, जब पांडवानी सिर्फ़ एक गीत न रहकर, एक संपूर्ण नाट्य-कला (theatrical form) बन गई। महावर उस बड़े सांस्कृतिक बदलाव पर भी रोशनी डालते हैं, जब कलाकारों ने सबल सिंह चौहान की हिंदी महाभारत को अपना लिया। उन्होंने पुरानी गोंड कहानियों से हटकर नया रूप तो अपनाया, लेकिन इस कला की मूल आदिवासी आत्मा को हमेशा जिंदा रखा। आज इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले कई कलाकारों का परिचय देकर, महावर ने इस विकसित होती कला का एक ज़रूरी दस्तावेज़ तैयार किया है। वर्तमान में यह एक ऐसी कला जो दुनिया भर के मंचों पर दर्शकों का दिल जीत रही है।

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