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आदिशिल्प संग्रहालय में आपका हार्दिक स्वागत है। यह संग्रहालय निरंजन महावर के निजी संग्रह की चयनित धरोहरों का एक डिजिटल प्रस्तुतीकरण है, जिसे संरक्षण और दस्तावेज़ीकरण की दृष्टि से सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। प्रत्येक चित्र को इस प्रकार उन्नत किया गया है कि मूल शिल्प, बनावट और सूक्ष्म विवरण सुरक्षित रहें।

किसी भी चित्र पर क्लिक कर आप उसे उच्च गुणवत्ता में विस्तार से देख सकते हैं। सभी छवियों का कॉपीराइट सुरक्षित है और वे केवल niranjanmahawar.in की संपत्ति हैं।

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बस्तर कांस्य

Project type

Craft

Location

बस्तर

यह अनुभाग बस्तर क्षेत्र की विश्वप्रसिद्ध धातु शिल्प परंपरा को समर्पित है, विशेषकर “लॉस्ट वैक्स” ढलाई तकनीक से निर्मित ढोकरा अथवा बेल मेटल कला को। छह दशकों में संकलित यह संग्रह कला-कौशल, आस्था और कुल-परंपरा के गहरे संबंध को उजागर करता है। ये मूर्तियाँ केवल सजावट की वस्तुएँ नहीं हैं; इन्हें जीवंत प्रतीक माना जाता है, जो मुरिया, गोंड और माड़िया जनजातियों के अनुष्ठानों और दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं।

बस्तर की कांस्य मूर्तियों की विशेषता उनकी सूक्ष्म और जटिल नक्काशी में निहित है। शिल्पकार महीन मोम की तारों से अलंकरण रचते हैं, जिनमें फन फैलाए नाग, सूर्य और चंद्र के चिह्न, तथा कमल के रूपांकन प्रमुख हैं। मूर्तियाँ कभी ठोस ढलाई में तो कभी पारंपरिक खोखले रूप में तैयार की जाती हैं। उनकी सतह पर कहीं अत्यंत सजावटी और बारीक काम दिखाई देता है, तो कहीं पत्थर जैसी सहज और चिकनी बनावट, जो इस कला की विविधता और गहराई को प्रकट करती है।

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